All that happens in the world. Hindi poem



बात तो बात ही है ,
रात गयी बात गयी ,
जमाना यही रहना है ,
सोच को बदलना है ,
स्वयं को बदलना है ,
दुनिया में जो होता है ,
तेरी मर्जी से नहीं होगा ,
उसे ही अपना लो ,
जो उसने चाहा है ,
 खयालो का ख्याल रखो ,
और जयादा ख्याल न करो ,
जो मन को सुकून दे,
दुनिया वैसी रमा लो,
अर्थो के पेच में न पड़ो ,
तुझे हज़ार आँखे घूरती है,
किस्में क्या बसा है,
किसकी क्या हसरत है ,
किसकी क्या तन्हाई है,
उसकी आँखे पथरा गयी है,
जहाँ कोई अर्थ नहीं बचा है ,
सारे वाकये अर्थ विहीन हो गए है,
उसके लिये जो या तो ,
इतना कमजोर था कि ,
लड़ न सका ,
या ईशारे  इतने निर्दय थे ,
वो तो वास्तव में ,
अभागा है,
जिसके आस पास कोई कली न खिलीं ,
तो भी क्या,
बाग में तो फूल है ,
जाने  क्या क्या पहलु है,
जाने क्या क्या आयाम है,
सोच में इतना अंतर है ,
कि कई सागर भी छोटे है,

 

 

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